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शाकाहार अपनाइए और कोरोना भगाइये
March 19, 2020 • सौरभ चौधरी

शाकाहार अपनाइए और गुजरात सरकार के आयुष विभाग द्वारा जारी परामर्श के अनुसार कोरोना वायरस से अपने को बचाइए: गिरीश जे.शाह

19 मार्च 2020; मुंबई (महाराष्ट्र)

एक समय था जब पूरी दुनिया बाल मृत्यु दर, प्राकृतिक आपदाओं, गरीबी और लगभग 100 अन्य समस्याओं पर ध्यान केंद्रित कर रही थी और पृथ्वी पर पर मानवता को बचाने के लिए प्रमुख मुद्दा बना हुआ था। लेकिन, आज हमारे पास केवल एक ही कोरोना वायरस COVID-19 है, जिसकी  जानलेवा ख़ौफ़ समूची दुनिया के सामने एक महामारी बनी हुई है, क्योंकि  इसके निवारक टीकों के विकास  मैं काफी समय लगेगा और तब कहीं बाजार में आने में आप आएगा। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता  स्वयं सेवी संस्था - "समस्त महाजन" ने सभी से अनुरोध किया है कि वे  शाकाहारी जीवन शैली अपनाकर इस बीमारी का नियंत्रण करें और प्राकृतिक जीवन शैली के अनुसार  पेड़ पौधों  पर आधारित औषधीय भोजन जो सबसे प्रभावी, आसान और आसानी से उपलब्ध  हो जाता है  वह  इस बीमारी को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से रोक सकेगा।

समस्त महाजन के मैनेजिंग ट्रस्टी गिरीश जयंतीलाल शाह ने आगे यह भी बताया कि आयुष विभाग और स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग, गुजरात सरकार द्वारा जारी की गई एडवाइजरी-परामर्श के अनुसार कोरोना वायरस निवारक उपायों का अनुशासनात्मक तौर पर पालन किया जाना चाहिए। इसके लिए लोगों में जागरूकता लाने, राहत शिविरोंआयोजित करने के लिए स्कूलों, कॉलेजों आदि से संपर्क कर के अधिकतम लोगों तक इस सूचना को पहुंचाई जानी चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि गुजरात सरकार ने संबंधित सभी विभाग को यह भी निर्देश दिया कि इन प्रसार कार्य की दैनिक कार्यवाही का मूल्यांकन करने हेतु सभी जानकारियां नियंत्रण अधिकारी को उपलब्ध कराई जाएंगी ताकि इस अभियान को बेहद सफल बनाया जा सके।

शाह मीडिया को सूचित करते हुए कहा है कि समस्ता महाजन की पूरी टीम कोरोना वायरस के नियंत्रण हेतु जन जागृति फैलाने के लिए सरकार के इस अभियान में शामिल हो दया है और इस उद्देश्य के सफलता हेतु कोरोना वायरस नियंत्रण कार्यालयों का पूर्ण समर्थन करते हुए  जनता से अपील किया है कि सरकार द्वारा सुझाए गए सभी निवारक उपाय प्रत्येक परिवार तक पहुंचाया जाएगा और इस महामारी को रोका जाएगा। इस संबंध में सरकार द्वारा जारी एडवाइजरी में आयुर्वेद या होम्योपैथी दिशा-निर्देशों के आधार पर आयुष विभाग द्वारा विधिवत निवारक उपाय बताया गया है जिसका पूरा विवरण नीचे किया गया है:

आयुर्वेद पद्धति द्वारा सुरक्षात्मक उपचार:

  1. क्वाथ: पथ्यादिक्वाथ+ दशमूल क्वाथ + निम्बकत्व: प्रक्षेप त्रिकटु
  2. तुलसी के रस के दो चम्मच में दो काली मिर्च का पाउडर डालें और इसे सुबह शाम लें।
  3. औषधियुक्त जल: सोंठ 1 चम्मच और दालचीनी एक चम्मच (या सोंठ के दो चम्मच) को 10 गिलास पानी में हल्की आँच पर तबतक उबालें जब तक कि वह 5 गिलास रह जाए।
  4. आवश्यकतानुसार गुनगुना करके पियें।
  5. धूप: सालई गूगल 50 ग्राम, सहिजन - 10 ग्राम, सरसों - 10 ग्राम, नीम का पत्ता - 10 ग्राम और गाय का घी - 20 ग्राम का मिश्रण बना लें। और 1 चम्मच मिश्रण को इलेक्ट्रिक धूप में
  6. या गाय के गोबर से बने हुए सूखे उपले पर सूर्योदय और सूर्यास्त में धूप करें।

होम्योपैथी से संबंधित सुरक्षात्मक उपाय:

  • आर्सेनिक एल्बम 30 पोटेंसी की चार गोलियाँ शाम को तीन से सात दिन तक लें
  • यदि वायरस का संक्रमण फैला होने का पता लगे, तो इसे एक महीने के बाद फिर से लें

आहार-विहार संबंधी सुझाव:

  • घर का बना, आसानी से पचने वाला, हल्का गर्म भोजन खायें
  • बासी भोजन, किण्वित उत्पाद, मैदे से बनी वस्तुयें, दही, दूध के उत्पाद, जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक, फ्रिज का पानी न लें।
  • विपरीत आहार का सेवन न करें। साथ ही फ्रिज में रखी हुई कोई भी वस्तु न खायें
  • मग, दाल और चने का गर्म सूप पियें
  • सब्जियों में, करेला, कच्ची मूली, लौकी, कद्दू, करी पत्ता, अदरक, हल्दी, लहसुन लें।
  • पचने में भारी और चिकनाई वाली सब्जियां न खायें।
  • फलों में पपीता, अनार और आँवला जैसे फल लें।
  • पाणी आधा उबालकर आराम से पियें या सोंठ डालकर उबाला हुआ पानी पियें।
  • अंडे और मांसाहार का त्याग करें।

व्यवस्था एवं प्रबंधन संबंधी सुझाव:

  • आसपास के, घर की और व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखना चाहिए।
  • भीड़ वाली जगहों पर न जायें। डिस्पोज़ेबल मास्क पहनने का खास ध्यान रखें।
  • हाथ की विशेष सफाई करना, आँख, नाक और मुँह को अनावश्यक बार-बार न छुयें।
  • सर्दी, खांसी के मरीजों से दूरी बनाए रखें।
  • विष्णुसहस्त्र मंत्र या अन्य मंत्रों का जाप करना। थोड़ा प्राणायाम और व्यायाम करना।
  • एक समय भोजन - दिन में एक बार ही भोजन करना। सूर्यास्त से पहले हल्का भोजन करें।
  • भोजन के तुरंत बाद फिर से कुछ और न खायें।
  • दिन के समय खासकर भोजन लेने के बाद न सोयें। साथ ही देर रात तक न जागें।
  • हल्दी नमक वाले गुनगुने पानी से कुल्ला करें।
  • सुबह के समय नाक में तिल के तेल की दो बूंदें डालें। और दोनों नथुने पर उँगलियों से लगायें।
  • शाम के समय घर में (सलाई गुगल, सहिजन, सरसों, नीम के पत्तों और गाय के घी) का धुआँ करें।
  • उबलते पानी में अजवाइन डालकर भाप लें।

 

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