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गोसेवा आयोग उ.प्र के अध्यक्ष प्रोफेसर श्यामनंदन सिंह राजधानी के किसी एक गांव की गोशाला को गोद लेकर  आदर्श केंद्र बनाना चाहते हैं
June 14, 2020 • डॉ. पि. के. त्रिपाठी एवं डॉ.आर. बी. चौधरी

उत्तर प्रदेश गौ सेवा आयोग अब गौशालाओं को आदर्श संस्था बनाने के लिए गोद लेगा-  लखनऊ शहर के पास की  एक गौशाला के बारे में विचार विमर्श जारी :अध्यक्ष -उ. प्र. गौ सेवा आयोग 


"गोसेवा आयोग उ.प्र के अध्यक्ष प्रोफेसर श्यामनंदन सिंह राजधानी के किसी एक गांव की गोशाला को गोद लेकर  आदर्श केंद्र बनाना चाहते हैं  ताकि इस मॉडल को पूरे प्रदेश में और जगहों पर प्रसारित किया जा सके। इस सम्बन्ध में आयोग के मुख्यालय पर एक बैठक आयोजित की गई।"

लखनऊ (उत्तर प्रदेश)
गोसेवा आयोग उ.प्र के अध्यक्ष राजधानी के किसी एक गांव की गोशाला को गोद लेना चाह रहे हैं। इस सम्बन्ध में  गोशाला आयोग के कार्यालय में एक बैठक आयोजित की गयी जिसमें गोशाला को गांव वालों के लिए कैसे उपयोगी बनाया जा सकता है और गोशाला से आमदनी के उपायों पर भी चर्चा की गयी। बैठक में यह बात उभर कर आई थी  गौ संरक्षण संवर्धन में  धन एवं संसाधनों की अत्यंत जरूरत होती है जिसे पूरा करने के लिए  गौशाला के उत्पाद अतिरिक्त आमदनी  एवं रोजगार के बेहतरीन उपाय है।  उत्तर प्रदेश गौ सेवा आयोग इन उपायों का फायदा लेने के लिए  अग्रसर है।  आयोग के अध्यक्ष का  विश्वास है कि आने वाले दिनों में  गौशाला के उत्पाद  एक लघु कुटीर उद्योग के रूप में विकसित होंगे  जिससे गोवंश की  रक्षा की जा सकेगी।

राजधानी की माडल गोशाला बनाया जाएगा:
गोसेवा आयोग के अध्यक्ष प्रो. श्याम नंदन सिंह ने कहा कि गोशाला को आत्म निर्भर बनाने के लिए आयोग हर सम्भव मदद करेगा। उन्होंने कहा कि मलिहाबाद क्षेत्र में आम का व्यवसाय अधिक होता है लेकिन बाकी समय लोगों को काम चाहिए। इसके लिए गोशाला के गोबर से वर्मी कम्पोस्ट खाद बनाकर बेची जा सकती है और उस खाद का प्रयोग चारागाह की खाली पड़ी जमीन पर चारा उगाने के अलावा औषधीय एवं फलदार पौधे लगाने के लिए उनमें उपयोग की जा सकती है। 

फॉरेस्ट, हॉर्टिकल्चर, फिशरीज सहित वन  एवं अन्य विभाग भी जुड़ेंगे:
उन्होंने कहा कि तालाब में मत्स्य पालन के लिए विभाग का सहयोग लिया जाएगा। गांव वालों की सुविधा के लिए विधायक निधि से सामुदायिक मिलन केन्द्र बनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि गोशाला में गोपालकों की संख्या बढ़ाकर दो से चार कर दीजिए। गांव के लड़कों एवं लड़कियों के लिए खेल के मैदान बनने चाहिए और स्किल डेवलपमेंट के लिए युवाओं को प्रशिक्षण दिलाया जाएगा। इसके लिए गांव की महिला समूहों को जोड़ा जाएगा। गांव की शिक्षित लड़कियों को अचार, मुरब्बा, जेली बनाने के लिए उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा प्रशिक्षित किया जाएगा।

प्रधान ने गोशाला को विकसित करने के लिए दिये कई सुझाव:
इस अवसर पर मौजूद ग्राम प्रधान राजेन्द्र कुमार मौर्य ने बताया कि उनके गांव में विकास की काफी सम्भावनाएं हैं। लेकिन सरकारी तंत्र की खींचतान के चलते उनके गांव में विकास की अपार सम्भावनाएं हैं। इसके लिए प्रधान राजेन्द्र कुमार मौर्य, आयोग के सचिव अनिल कुमार शर्मा, डॉ. सुरेश चन्द , एसडीओ वन, आलोक पाण्डेय, उद्यान निरीक्षक आरती वर्मा,डा.पी.के. त्रिपाठी, राधेश्याम दीक्षित उपस्थ्ति थे। सभी ने अपने—अपने सुझाव दिये।

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