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गौशाला स्वावलंबन के लिए गांव के परंपरागत संसाधनों का पुनर्जीवन जरूरी है : देवेंद्र जैन
December 28, 2019 • डॉ.आर. बी. चौधरी

समस्त महाजन  द्वारा आयोजित तीन दिवसीय जीवदया प्रशिक्षण कार्यक्रम आज से आरंभ 

परलई ( सिरोही) , राजस्थान

राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता  जीव. दया  को समर्पित  लोकप्रिय संस्था "समस्त महाजन" द्वारा संचालित तीन दिवसीय प्रशिक्षण  कार्यक्रम एवं सम्मेलन आज राजस्थान मे सिरोही जिले के परलई  में संचालित "सूरी प्रेम जीव रक्षा केंद्र संस्थान" से आरंभ हुआ। जिसमें तकरीबन 232 गौशाला प्रतिनिधि  शामिल हुए।  संस्था के मैनेजिंग ट्रस्टी गिरीश जयंतीलाल शाह के नेतृत्वमें संचालित इस कार्यक्रम के संचालक देवेंद्र जैन ने बताया कि यह  प्रशिक्षण कार्यक्रम आगामी 3 दिनों तक चलेगा जिसका समापन गुजरात  में स्थित  चारा उत्पादन के लिए प्रख्यात "धर्मज" गांव में  किया जाएगा ।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रथम सत्र में  सूरी प्रेम जीव रक्षा केंद्र संस्थान के प्रभारी मनीष भाई ने  सभी प्रति आग्रह किया कि वह  गौशालाओं के संचालन के लिए  सुनियोजित ढंग से फंड व्यवस्था करे।  उन्होंने बताया कि उनकी गौशाला वर्तमान में एक से डेढ़ करोड़ रुपए प्रति वर्ष विभिन्न प्रकार  की सहयोग राशि प्राप्त करती है। वर्तमान में गौशाला में सभी आधुनिक व्यवस्थाएं की गई है जिसमें चारा काटने की मशीन से लेकर पशुओं को  नाद में चारा परोसने की भी व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि  गौशाला गोदाम से चारा पहले मशीन के द्वारा चारा  ट्रैक्टर ट्रॉली में भरा जाता हैफिर मशीन से ही आवंटित होता है। उन्होंने मरे हुए पशुओं को सम्मान पूर्वक समाधि के लिए वैज्ञानिक तरीका भी बताया और कहा कि पर्याप्त नमक डालने से पशु  ठीक से गल जाता है और उसका बढ़िया खाद बनता है। इस प्रकार उन्होंने अपने कई अनुभव को साझा किया।

मनीष भाई ने गौशाला फंड व्यवस्था को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा  कि उनकी गौशाला में  सहायता के लिए कई योजनाएं चलाई गई है जिसमें गोदनामा कार्यक्रम के तहत सालाना  प्रति गाय ₹15,000 सहयोग राशि प्राप्त किया जाती है। अब तक तकरीबन 400 गाय गोदनामा कार्यक्रम  के माध्यम देखभाल की जा रही है। इसी प्रकार जन्मदिन एवं अन्य विशेष  शुभ अवसर पर शुभ संदेश भेजने हेतु हर साल "एसमएस" से 35 -40 लाख रुपए , गायों से प्राप्त गोबर की खाद बेच कर 10 लाख रुपये एवं सिलापट् पर  नामांकन करके तकरीबन डेढ़ करोड़ रूपया एकत्र किया जाता है। मनीष भाई ने  यह भी बताया कि उनकी गौशाला रोजमर्रा की खर्च विभिन्न प्रकार के सहायता से संचालित की जाती है। जब कभी वह गौशाला के किसी विशिष्ट कार्य के लिए सहायता मांगते हैं तो कार्ययोजना के कुल लागत से अतिरिक्त धनराशि की माग करते हैं और कार्य योजना से शेष राशि को बचाते जाते हैं जिसका नतीजा आज यह है कि उनकी  गौशाला के पास 5 करोड़  रुपए की  फिक्स डिपाजिट है जिसके ब्याज से मरम्मत इत्यादि का कार्य आसानी से होता है।  उन्होंने बताया कि  अच्छा काम कर से  सरकार से भी गोशाला संचालन के लिए सहायता मिल जाती है।

आज के सत्र समापन के अवसर पर प्रशिक्षणार्थियों का भ्रमण पावापुरी स्थित केपी संघवी गौशाला में कराया गया। जहां 5,000 से अधिक छुट्टा पशुओं की व्यवस्था के पी संघवी परिवार के द्वारा किया जाता है। के पी संघवी  गौशाला के प्रबंधक महावीर जैन ने बताया कि उत्तम व्यवस्था होने के नाते यहां पल रहे  पशुओं की मृत्यु दर करीब-करीब नहीं के बराबर है। इस अवसर पर समस्त महाजन के ट्रस्टी एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम के संचालक देवेंद्र भाई ने बताया कि गौ पशुओं द्वारा अपने मुख से गोचर में घूम कर  चरा हुआ चारा, बरसात का पानी और वृक्ष की छाया प्राप्त करने की व्यवस्था कर दी जाए तो देश भर की गौ संरक्षण- संवर्धन की समस्या को सुलझाया जा सकता है। 

सिरोही कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. महेंद्र सिंह चांदावत  ने मवेशियों के देखभाल के प्रबंधन में सावधानी बरतनी की अपील की और बताया कि गाजर घास से मवेशियों को तमाम प्रकार के चर्म रोग की समस्याएं उत्पन्न होती है। इसलिए हमें जँहा भी गाजर घास दिखाई दे उसे जड़ से उखाड़ फेंकना चाहिए। उन्होंने सभी से निवेदन किया कि सहजन या ड्रमस्टिक के पतियों को  पशुओं को खिलाये  क्योंकि सहजन की पत्तियों को खिलाने से पशुओं का  पाचन  प्रक्रिया अच्छी होने से उनका स्वास्थ्य अच्छा रहता है। गोशालाओं में  सहजन जैसे महत्वपूर्ण वृक्षों के रोपड़ से  कई तरह के फायदे होते हैं तथा गोचर  भूमि पर ज्यादा से ज्यादा औषधिय  वृक्ष लगाने चाहिए। इस अवसर पर  लोकप्रिय मोटिवेशनल स्पीकर दीपक भाई बारडोली ने गौ संरक्षण के धार्मिक महत्ता की बात को गीतों और कविताओं के माध्यम से प्रस्तुत कर सबका मन मोह लिया। प्रोफेसर  हीरा रामजी गोदारा उर्फ संत "आनंद किरणजी" ने समस्त महाजन के प्रशिक्षण की कोशिश  आज की आवश्यकता बताया और  कहा कि समस्त महाजन किए गए कार्यों का भविष्य में बहुत ही सम्मान प्राप्त होगा। 

समस्त महाजन  के राजस्थान कोऑर्डिनेटर रविंद्रजी जैन  ने बताया कि इस  शीतकालीन प्रशिक्षण सत्र में  शामिल  प्रशिक्षणार्थी राजस्थान के विभिन्न ज़िलों से आए हैं। आज के कार्यक्रम के तहत गौशाला प्रबंधन, अनुदान व्यवस्था, घास उत्पादन एवं गोचर विकास तथा पशु स्वास्थ्य के विभिन्न मुद्दों पर व्यवहारिक बातें बताई गई। साथ ही साथ  वर्तमान परिपेक्ष में देसी  नस्ल के गो  पशुओं के लालन - पालन ,भरण - पोषण एवं संरक्षण- संवर्धन के महत्व को  बताया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम के सभी  कार्यक्रमों का विधिवत संयोजन एवं मधुर संचालन रविंद्र जैन ने किया जिसे  सभी प्रशिक्षणार्थीयों ने ध्यान मग्न होकर सुना। पावापुरी तीर्थ के 900 विघा के बंम्बा फार्म में झिंज़वा घास का निरीक्षण कर भेरू तारक तीर्थ में आज की दिनभर के प्रशिक्षण कार्य की समीक्षा की गई प्रशिक्षण में शरीक  प्रतिभागियों ने अपने अपने  प्रश्नों का जवाब पूछा और समस्त महाजन की ओर से उसका जवाब दिया गया। 

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