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देश में पहली बार पशु चिकित्सक स्वास्थ्यकर्मी के साथ मिलकर आपदा प्रबंधन में हाथ बटाएँगे , नए नियम जोड़े गए : गिरीश जयंतीलाल शाह
March 27, 2020 • डॉ.आर. बी. चौधरी

करोना वायरस के लॉकडाउन के विकट परिस्थिति में देश भर के पशु चिकित्सकों को केंद्र सरकार ने  महत्वपूर्ण बताया

नई दिल्ली ; 26 मार्च, 2020

आज करोना के आतंक से पूरा देश काँप रहा है. किस सामान को छू लेने से करोना वायरस का प्रवेश किस के अंदर हो जाएगा कुछ कहा नहीं जा सकता.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोगों से हाथ जोड़ कर विनती कर रहे हैं कि जानलेवा वायरस के लॉकडाउन करने के लिए सरकार के दिशा निर्देशों का शत-प्रतिशत पालन करें. वायरस के लॉक डाउन आदेश के परिपालन के लिए पूरे देश की मशीनरी अपने प्राण न्योछावर कर देशवासियों को बचाने में दिन – रात एक कर दिया है.जहां सबके सुरक्षा व्यवस्थाके लिए नए-नए उपाय खोजे जा रहे हैं वही वायरस को अगले चरण में जाने से रोकने के लिए तमाम संस्थाएं अपनी सेवाएं देने के लिए सामने आ रहे हैं.आज देर शाम को  केंद्रीय पशु पालन मंत्रालय ने देशभर के सभी राज्यों से अनुरोध किया है कि आकस्मिक चिकित्सा सेवा में सभी राज्य सरकारें पशु चिकित्सकों को शामिल करें ताकि पशुओं की देखभाल सुनिश्चित की जा सके.

सूत्रों के अनुसार पशु पालन मंत्रालय को दो दिन पहले एक पत्र लिखकर पशु चिकित्सकों को आकस्मिक सेवा कार्य में शामिल करने की मांग करने वाले भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड के सदस्य गिरीश जयंतीलाल शाह ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक पशु प्रेमी व्यक्ति है जितना उन्हें अपने देशवासियों से प्रेम है उतना ही देश की पर्यावरणतथा पशु -पक्षियों से भी.यह बात कभी कभी वह है अपने भाषण में भी बोल जाते हैं . प्रधानमंत्री के विशेष निगरानी एवं निर्देशन में करोना वायरस के लॉकडाउन की हालात का पल-पल की खबर रखते हैं.यही कारण है कि उन्हें इंसान की चिंता के साथ-साथ पशुओं के रक्षा की भी उतनी चिंता है. यही कारण है कि देशभर के पशु चिकित्सकों को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन की मुख्यधारा में जोड़ने का दिशा – निर्देशन दिया गया है. कोरोना वायरस नियंत्रण के लिए बनाई गई क्वॉरेंटाइन व्यवस्था के नियमावली का सभी को पालन करना चाहिए ताकि इस महामारी से हमें जल्दी से जल्दी छुटकारा मिल जाए. सरकार के इस प्रयास से अब यह सुनिश्चित हो गया कि चिकित्सा के अभाव में किसी पशु पक्षी का प्राण नहीं जाएगा.

शाह ने आगे यह भी बताया कि देश में करोना लॉकडाउन के कारण छुट्टी पर जाने वाले पशु चिकित्सकों का पूरा समूह आकस्मिक सेवा दल के साथ जुड़ना चाह रहा था .चूँकि, यह विचार इतना महत्वपूर्ण था कि इस पर पहल करने की अत्यंत आवश्यकता थी. इस मामले को पशुपालन मंत्रालय के सामने रखा गया और मंत्रालय पशु स्वास्थ्य प्रबंधन एवं देखरेख की गंभीरता को लेते हुए अपील को अपने संज्ञान में लिया जिसका नतीजा है कि आज मंत्रालय प्रदेश सरकारों को सभी आवश्यक सुविधाएं मुहैया कराने के लिए आदेश दे रहा है.उन्होंने कहा कि पशुपालन मंत्रालय इस कार्य के लिए सचमुच बधाई का पात्र है.उन्होंने बताया कि इस समाचार को सुनते ही देशभर के पशु प्रेमियों ,पशुपालकों एवं पशु पक्षियों से जुड़े सभी लोगों में खुशहाली की लहर दौड़ गई और केंद्र सरकार के इस इस कदम की प्रशंसा कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि मंत्रालय के साथ बातचीत करके छोटी- मोटी अन्य शेष बातें जल्दी ही सुलझा ली जाएंगी.

पशुपालन मंत्रालय द्वारा दो पृष्ठ के जारी सर्कुलर पत्र में राज्य सरकारों को बड़े ही स्पष्ट ढंग से पशु चिकित्सकों द्वारा सेवा लिए जाने की बात कही गई है और यह कहा गया है कि पशु चिकित्सकों के शामिल हो जाने से कई तरह की जूनोटिक बीमारियां और आकस्मिक चिकित्सा तथा भरण पोषण की व्यवस्था को सुनिश्चित करने में आसानी होगी और लॉक डाउन अभियान को किसी हालत में कमजोर होने नहीं दिया जाएगा. संयुक्त सचिव ने अपने पत्र में प्रदेश सरकारों को यह स्मरण कराया है कि एक दिन पहले गृह मंत्रालय द्वारा जारी प्रपत्र में पशु चिकित्सा सेवा को जोड़ दिया गया है जिसके तहत पशु चिकित्सा को आपदा प्रबंधन में सेवाएं ली जाएंगी जिसकी शुरुआत कर दी गई है और किसी भी पशु को स्वास्थ्य सेवा सेअलग नहीं रखा जाएगा.

उन्होंने बताया कि पशु चिकित्सा सेवा को आकस्मिक सेवा में शामिल करने की पहली पहल उत्तराखंड राज्य पशु चिकित्सा संघ ने इस माह19 मार्च को रखा था जिसकी महत्ता को समझते हुए कुछ ही घंटों में आपातकालीन सेवा में शामिल होने की अनुमति आ गई. यह बता दें कि केंद्र सरकार द्वारा जारी आदेश के पहले से ही उत्तराखंड राज्य अपनी पशु चिकित्सा सेवाओं को लेकर काम करता रहा है.उन्होंने बताया कि उत्तराखंड का अनुसरण करते हुए झारखंड राज्य पशु चिकित्सा सेवा संघ के पशु चिकित्सक भी पशु चिकित्सा सेवा को आकस्मिक सेवादल के साथ जोड़ने आशा लगाए बैठे हैं। हालांकि इस संबंध में झारखंड पशु चिकित्सा सेवा संघ प्रस्ताव भेज चुका है और राज्य सरकार का जवाब प्रतीक्षारत है शाह का मानना है कि केंद्र सरकार के इस सर्कुलर से पूरे देश उच्च कोटि का पशु चिकित्सा का कार्य आरंभ होगा.

शाह ने बताया कि जहां उत्तराखंड राज्य पशु चिकित्सा संघ के सबसे कर्मठ एवं लोकप्रिय पदाधिकारी, डॉ आशुतोष जोशी उत्तराखंड राज्य पशु कल्याण बोर्ड के प्रमुख हैं, वही झारखंड राज्य जीव जंतु कल्याण बोर्ड के प्रमुख अधिकारी, डा.शिवानंद काशी है. दोनों अधिकारी राज्य जीव जंतु कल्याण बोर्ड के स्थापना एवं क्रियान्वयन के शिल्पी है और अपने लगन तथा निष्ठा के आधार पर राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों को अपने कार्यों से प्रभावित कर पशु कल्याण बजट प्राप्त और इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने में बेहद सफल रहे है.

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