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डा. शिवानन्द काँशी पहली बार पशु कल्याण के क्षेत्र में झारखण्ड रत्न 2020 से सम्मानित
March 3, 2020 • डॉ.आर. बी. चौधरी

झारखण्ड जीव-जन्तु कल्याण बोर्ड के उद्भव एवं विकास में डा. शिवानन्द काँशी का योगदान के लिए लोक सेवा समिति द्वारा पहली बार पशु कल्याण के क्षेत्र में झारखण्ड रत्न 2020 से सम्मानित

नई दिल्ली ,3 मार्च ,2020 

लोक सेवा समिति की राष्ट्रीय अधिवेशन की 29वीं वर्षगांठ नयी दिल्ली में मनायी गयी। झारखण्ड के माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन को अतिविशिष्ट सेवा सम्मान से नवाजा गया है साथ ही पशु कल्याण एवं स्वच्छता एवं पशु सेवा कल्याण के क्षेत्र में समिति द्वारा आवार्ड की शुरूवात पहली बार की गई है। गौरतलब है कि समिति की ओर से पूर्व में पदमश्री डा॰ रामदयाल मुण्डा, डा॰ बीपी केशरी, क्रिकेटर महेन्द्र सिंह धोनी, गंगा प्रसाद बुधिया पदमश्री मुकुंद नायक और मधु मंसूरी समेत कई अन्य को सम्मानित किया जा चुका है। 

डा॰ शिवानन्द काँशी का संक्षिप्त परिचय:- डा॰ काँशी का जन्म हटिया में वर्ष 1977 में हुआ। इनकी शिक्षा दीक्षा राँची शहर में हुई ये अत्यंत साधारण परिवार से आते हैं। फरवरी, 1998 में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की परिक्षा में 165 रैंक प्राप्त कर क्रांति सिंह नाना पाटिल पशुचिकित्सा महाविद्यालय, शिरवल महाराष्ट्र में अध्ययन रत होकर वर्ष 2003 में बीवीएससी एंड एएच की डिग्री प्राप्त किए एवं वर्ष 2006 में बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, काँके अन्तर्गत राँची पशुचिकित्सा महाविद्यालय, काँके से एम वीएससी( गाइनेकोलॉजी) में डिग्री प्राप्त किए। वर्ष 2006 में झारखण्ड सरकार के पशुपालन विभाग में अपना योगदान पशुचिकित्सा पदाधिकारी के रूप में करते हुए विभिन्न क्षेत्र यथा सूकर प्रजन्न प्रक्षेत्र, पशुपालन प्रशिक्षण केन्द्र, पशु स्वास्थ्य एवं उत्पादन संस्थान, क्षेत्रीय निदेशक कार्यालय, राज्य जीव-जन्तु कल्याण बोर्ड में रहते हुए प्रसार, प्रशिक्षण, लाइव स्टॉक रिसर्च पब्लिकेशन के निर्धारण के साथ-साथ राज्य सरकार एवं केन्द्र सरकार के पशुकल्याण कार्य से संबंधित विभागों से समन्वय स्थापित कर पशु कल्याण एवं पशुओं के उत्पादन वृद्धि में कार्य किए।

वर्ष 2013 में पशुचिकित्सा के दौरान डाक्टर शिवानंद काँशी का उग्रवादियों द्वारा अपहरण किया गया था। डा॰ काँशी के अनुसार ‘‘उनके द्वारा मुक पशुओं के चिकित्सा एवं निस्वार्थ सेवा, मेरे माता-पिता, अद्र्धागनी, बेटा-बेटी के पुण्य  कार्यों एवं दुआओं का प्रतिफल है जिससे मुझे पुनर्जीवन मिला।’’ डा॰ काँशी ने यह भी बताया कि‘‘ जब मुझे 2014 के अक्टूबर में राज्य जीव-जन्तु कल्याण बोर्ड, झारखण्ड का दायित्व मिला तो उस समय मैं पशु कल्याण एवं इससे संबंधित कार्यों के साथ ही पशुओं के लिए एक सशक्त माध्यम बन गया। मेरी उत्सुकता-जिज्ञासा बनती चली गई। इस विषय को अत्याधिक जानने की लालसा बढ़ती चली गई। शुरूवात के दिनों में पशुकल्याण विषय के जानकारी के लिए डा॰ काँशी द्वारा नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ एनिमल वेलफेयर तथा तमिलनाडु वेटरिनरी साइंस यूनिवर्सिटी से प्रशिक्षण प्राप्त किया गया साथ ही अन्य राज्यों में पशुकल्याण क्षेत्र के कार्यों का अध्ययन एवं भ्रमण किया गया। डा॰ काँशी पुरे देश में दूसरे ऐसे पदाधिकारी है जिन्होंने राज्य के ब्यूरोक्रेटस  को पशुकल्याण के क्षेत्र में संवेदनशील बनाने में सफलता अर्जित कर पहली बार जिला पशु क्रूरता निवारण समिति को क्रियाशील बनाने, लाइन फॉर सीमेंट एजेंसी को संवेदनशील बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा बजट उपबंध कराने में सफलता प्राप्त किया।    

डा. शिवानन्द काँशी,भ्रमणशील पशुचिकित्सा पदाधिकारी, सिंहपोखरिया , चाईबासा सह-नोडल पदाधिकारी,राज्य जीव जन्तु कल्याण बोर्ड, झारखण्ड, राँची ,वर्तमान में पशुचिकित्सा पेशे की उन्नति के लिए इस बार डा. शिवानन्द काँशी भारतीय पशुचिकित्सा परिषद में सदस्य निर्वाचित होने के लिए विसीआई चुनाव 2020 के डेमोक्रेटिक एलायंस के 11 सदस्य के पैनल से उम्मीदवार हैं। पशुचिकित्सक समुदाय से अपील है कि आप भारतीय पशुचिकित्सा परिषद के चुनाव में अपना बहुमुल्य मत देकर डा. काँशी को चयनित करे ताकि देश भर के पशुचिकित्सकों के वर्तमान चुनौतियों के निराकरण उनका सम्मान और आधिकार प्रप्ति में नेतृत्व का अवसर प्रदान करे जिससे सभी संभावित संभवनाओं को एक सुत्र में पिरोकर पशुचिकित्स समुदाय को देश के मनुष्य डा. समुदाय के समकक्ष उनका हक प्रदान करा सकें।

पशु कल्याण के क्षेत्र में कार्य हेतु डा॰ काँशी को सोसायटी फॉर साइंटिफिक डेवलपमेंट एंड कल्चर एंड टेक्नोलॉजी द्वारा यंग साइंटिस्ट अवॉर्ड से मध्य प्रदेश के ग्वालियर में में सम्मानित किया गया है। भारतीय जीव जन्तु कल्याण बोर्ड द्वारा भी डा॰ काँशी को पशु कल्याण के क्षेत्र में कार्य प्रशिक्षण के प्रोत्साहन हेतु “ हॉनरेरी एनिमल वेलफेयर ऑफिसर” का सम्मान दिया गया है। डा॰ काँशी पशु पोषण अनुसंधान दर्शन, एनिमल वेलफेयर एवं पशुधन प्रहरि जैसे राष्ट्र के ख्याति प्राप्त एनिमल साइंस  और वेटरनरी जनरल  के सलाहकार के रूप में भी मनोनित है।डा. काँशी को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली द्वारा अनुत्पादक गौवंश को कैसे उत्पादनशील बनाया जाए एवं माडल गौशाला के संबंध में दिशा निर्देश निर्गत कर सम्पूर्ण भारतवर्ष में स्थापित करने हेतु विभिन्न राज्यान्तर्गत स्थित गौशालाओं के अध्ययन हेतु गठित समिति में सदस्य के रूप में नामित किया गया एवं समिति द्वारा अध्ययन उपरान्त एवं अनुसंशा के अनुसार “ ड्राई ड्रेरी मॉडल  फॉर प्रोडक्टिविटी एंड इट्स मैनेजमेंट”  नामक पुस्तिका का प्रकाशन आईसीएआर, नई दिल्ली किया गया है। डा. काँशी के कार्यानुभव एवं क्षेत्र से पशुकल्याण विषय पर उत्पन्न समस्या को ध्यान में रखते हुए एक पुस्तिका “ हाउ टू इंप्लीमेंट एनिमल वेलफेयर लॉ” नामक पुस्तिका तैयार किया जा रहा है।

डॉक्टर काशी बताते हैं- "मैं बड़ा आभारी हूँ कि भारतीय जीव-जन्तु कल्याण बोर्ड के सहायक सचिव एवं प्रधान संपादक,  डॉ. आर. बी. चैधरी जो काफी लंबे समय तक भारत सरकार के द्वारा संचालित पशु कल्याण शिक्षण-प्रशिक्षण से जुडे रहे, वह एक मसीहा के रूप में मार्गदर्शन करते रहे। इसी प्रकार उत्तराखण्ड जीव -जन्तु कल्याण बोर्ड के प्रभारी डा. एके. जोशी जैसे बड़े विशेषज्ञ अधिकारी अपना योगदान देते रहे हैं और उनका सहयोग-समर्थन, अनुभव, मार्गदर्शन लगातार मिलता रहा है। मेनका गांधी की सहयोगी श्रीमती गौरी मौलेखी जो भारतीय जीव-जन्तु कल्याण बोर्ड में को-अपडेट मेंबर भी रही है, का योगदान और सहयोग मेरे जीवन में आमूलचूल परिवर्तन लाया। सभी का मुझे इस दिशा में काम करने की निरंतर साहस और प्रेरणा मिलती है। वर्तमान में डा.शिवानन्द काँशी को पशु कल्याण विरोधी एवं तस्करी समर्थित लोगों ने अपनी ताकत से उन्हें राज्य जीव-जन्तु कल्याण बोर्ड झारखण्ड से बेदखल कर दिया। उन्हे जड़-मूल से उखाड़ने का प्रयास ही नहीं साजिश चलाई जा रही है।" 

ऐसे में यह कहना न्याय संगत है कि डा॰ काँशी जैसे कर्मठ, योग्य, लगनशील, समर्पित, ईमानदार और विषय विशेषज्ञ को इस विषय से दूर करना प्रदेश का बहुत बड़ा नुकसान होगा। अक्सर देखा गया है कि डा. काँशी जिस काम में लग जाता हैं उसे अंतिम बिंदू तक पहुंचा देते हैं। वैसे डा.काँशी पशु चिकित्सा के पढ़ाई और विशेषज्ञता के साथ-साथ में पशु कल्याण जैसे नए विषय के गहराई में जाने का एक दिनचर्या बना लिया है। उसी में जीते हैं और बसते हैं। नई-नई बातों को उजागर कर प्रदेश की सेवा में निरंतर तल्लीन है. डा. काँशी जैसे होनहार, युवा पशु चिकित्सक विशेषज्ञ के अनुपस्थिति में यह विषय सुनसान हो जाएगा वीरान हो जाएगा जिसका सीधा असर प्रदेश के पशु कल्याण विकास कार्यों पर पड़ेगा। साथ ही साथ केन्द्र सरकार से राज्य सरकार को जोड़ने की प्रक्रिया बाधित हो जाएगी जिसका असर योजनाओं को राज्य सरकार को धरालत में लाने पर पड़ेगा। डा.शिवानन्द काँशी को क्षेत्र पशु कल्याण में लोक सेवा समिति द्वारा झारखण्ड रत्न (सर्वोच्च सम्मान) डा. काँशी के योगदान और कोशिशों का विवरण दिया जा रहा हैं जिससे उनके कार्यों की ठीक प्रकार से समझा जा सकता है।

सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार राज्य जीव-जन्तु कल्याण बोर्ड एवं जिला पशु क्रूरता निवारण समितियों के गठन, पुनर्गठन जैसे धरातल के कार्य में विशेष योगदान।डा. काँशी के प्रयास से प्रत्येक जिला पशु क्रूरता निवारण समिति में एक पशु शरण स्थल निर्माण करने उसमें पशु अस्पताल बनाने पशु रोगी वाहन की व्यवस्था करने और एक पशु चिकित्सक को नियुक्त करने की योजना अत्यंत लोकप्रिय रही है जिस की संरचना का कार्य बड़े तेजी से चल रहा था।डा. काँशी के विशेष योगदान से जीव-जन्तु पशु पक्षियों पर होने वाले विभिन्न तरह के अपराधों को रोकने के लिए लाॅ एनफोर्समेंट एजेंसी के गठन, उनको प्रशिक्षण देकर संवेदनशील बनाना तथा पशु से संबंधित कानून का संकलन कर पुस्तक के प्रकाशन का कार्य चल रहा है जो पशु कल्याण अभियान का प्रमुख हिस्सा है।

छुट्टा पशुओं के नियत्रंण की समस्या देश प्रदेश चारों और विकराल रूप धारण कर चुकी है जिसका असर जनसामान्य से लेकर के पर्यावरण सुरक्षा सफाई सभी पर पड़ता है और इस कार्य को निराकरण की ओर ले जाने की योजना विेशेष प्रगति की ओर चल रहा है।इसी प्रकार छुट्टा श्वान पशुओं के द्वारा पैदा होने वाली समस्याएं जैसे डाग बाइट-रेबीज समस्या तथा गंदगी से संबंधित अन्य प्रकार की समस्या के नियंत्रण के लिए एनिमल बर्थ कंट्रोल  एंड एंटी रेबीज वैक्सीनेशन प्रोग्राम के संचालन के लिए पायलट प्रोजेक्ट के निर्माण एवं संचालन की योजना।अवैधानिक पशु वधशाला-स्लाटर हाउस के नियंत्रण एवं नियमन संबंधित क्रियाकलापों को सक्रिय बनाना और वैज्ञानिक विधि से संचालित करने की योजना को सफल बनाने का कार्य जिससे सड़क के किनारे चालए जा रहे छोटे बड़े बधशालाओं को रोका जा सके और केन्द्रीय कानून का हो रहा खुला उल्लंघन भी नियंत्रित किया जा सके जिसमें फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट, 2006 तथा फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड (रजिस्ट्रेशन एंड लाइसेंसिंग आफ फूड बिजनेस) रेगुलेशन 2011 को लागू कराना संभव हो सके।

इसी प्रकार पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 एवं तदविषयक नियम के साथ झारखण्ड गोवंशीय पशु हत्या प्रतिषेध अधिनियम, 2005 एवं नियम, 2011 का अनुपालन सनिश्चित कराने की व्यवस्था भी एक प्रमुख कार्य योजना जारी है।यदि देखा जाए तो पशु कल्याण विषय एक बहुत ही नया एवं गंभीर विषय है जिसमें पशु चिकित्सा विज्ञान के मूलभूत आधार छूपे हुए हैं। इस विधा के माध्यम से पशुओं और मनुष्यों की भलाई की जा सकती है। इतने ही नहीं इसके माध्यम से पर्यावरण और पारिस्थितिकि संतुलन को बनाए रखने में भी बहुत बड़ा योगदान हो सकता है। यह देखा गया है कि पूरे देश भर में कुछ समर्पित राज्य ही इस दिशा में आगे हैं। 

बताया जाता है कि उत्तराखंड के बाद झारखण्ड राज्य ही ऐसा देश का राज्य है जहां पर पशु कल्याण के आदेशों का पूर्ण पालन किया जा रहा है। प्रदेश में बड़े प्रभावी ढंग से कार्य का संचालन चल रहा है यहां पर यह कहना अत्यंत आवश्यक है कि डा॰ शिवानन्द काँशी झारखण्ड राज्य जीव-जन्तु कल्याण बोर्ड की स्थापना से लेकर आज तक संघर्ष करते रहे जिसका नतीजा है कि आज झारखण्ड राज्य पूरे देश में दूसरे स्थान पर है। राज्य विभाजन के बाद तमाम चुनौतियों का सामना करते हुए पशुपालन विभाग इस विषय को इतनी ऊंचाइयों तक ले गया है जिसका नाम देश के अग्रणीय प्रदेशों में रखा जा रहा है। 

इसका प्रमुख श्रेय तमाम मार्गदर्शक को, अधिकारियों और राजनैतिक हस्तियों के मार्गदर्शन में डा॰ शिवानन्द काँशी को जाता है। डा॰ शिवानन्द काँशी का मानना है कि यह विषय आज एक कठिन दौर से गुजर रहा है ऐसी अवस्था में यदि राज्य जीव-जन्तु कल्याण बोर्ड, झारखण्ड को हतोत्साहित कर दिया जाएगा तो आज तक के सारे प्रयास अधूरे रह जाएंगे। झारखण्ड सरकार को इस विषय पर बड़े गंभीरता से विचार करते हुए निर्णय लेना चाहिए और केन्द्र सरकार से अपने संबंध बनाकर के अधिक से अधिक प्रदेशवासियों और यहां के पशु पक्षियों के रख-रखाव की बेहतरीन व्यवस्था करनी चाहिए।  

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