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"समस्त महाजन" ने जरूरतमंदों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए "रोटी बैंक" का नया फॉर्मूला अपनाया
May 30, 2020 • डॉ.आर. बी. चौधरी

एक परिवार से शुरू समस्त महाजन का रोटी बैंक कार्यक्रम अब 3,800 से अधिक परिवारों का विशाल समूह बन गया- इसमें  जरूरतमंदों के लिए रोटी है तो  मुंबई के कबूतरों के लिए दाना भी: गिरीश जयंतीलाल शाह

मुंबई (महाराष्ट्र) , 30 मई 2020

करोना लॉक  डाउन के पहले से  रोटी बैंक का संचालन एक आम बात बन गया है।  हर शहर में रोटी या भोजन एकत्र कर जरूरतमंदों को खिलाने का काम लोग  करते रहे हैं। वैसे रोटी बैंक की शुरुआत   आज से तकरीबन 2 साल पहले मुंबई  के रिटायर्ड डीजीपी, डी शिवानंदन मुंबई के प्रसिद्ध टिफिन वाहक 'डब्बावालों' के साथ मिलकर के होटलों और ढाबों से बचे हुए  भोजन  को एकत्र कर  भूखे प्यासे  लोगों में बांटने की  मंशा से  शुरू की गई जो धीरे-धीरे आज देश के कई शहरों में संचालित किया का रहा है । लेकिन सवाल यह है कि  भोजन के सबसे बड़े स्त्रोत  होटल और ढाबे  अगर बंद हो तो फिर क्या किया जाए।  इस कार्य में एक अनोखी पहल  समस्त महाजन के  स्वयंसेवी  हीरालाल जैन ने पिछले चार अप्रैल से  रोटी संकलन एवं वितरण का कार्य को नया आयाम दे दिया है। इस कार्य कोशुरू में उन्होंने अपने घर से चालू किया। फिर क्या, इससे प्रभावित होकर उनके पास -पड़ोस के चंद लोग जुड़े और एक कारवां बन गए। सफलता से उत्साहित हीरालाल ने अपनी संस्था समस्त महाजन के मुखिया से बात कर इसे सुनियोजित अभियान का रूप देने का  निश्चय कर लिया और आज कुल 3,800 से अधिक परिवार इस अभियान में शामिल हो चुके हैं। 

संस्था के मैनेजिंग ट्रस्टी  गिरीश जयंतीलाल शाह ने बताया कि  उनके संस्था के स्वयंसेवक अर्थात वॉलिंटियर हीरालाल जैन जरूरतमंदों के लिए एक ऐसा सफल अभियान लेकर आए हैं तो शाह ने  तत्काल इस कार्यक्रम संचालन का सहमति दे दी। हालांकि ,हीरालाल जैन ने रोटी बैंक की शुरुआत  रोटी के साथ गुड बांटने की की थी किंतु समस्त महाजन के सहयोग से गुड एवं रोटी की जगह सब्जी -दाल और खीर का भी वितरण आरंभ हो गया।  उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम के संचालक हीरालाल जैन का सेवा भाव अद्भुत है। वह अत्यंत उत्साही एवं कर्मठ कार्यकर्ता है जो पिछले कई वर्षों के दौरान समस्त महाजन कि अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत नेपाल में पशु बलि को रोकने के लिए संचालित अभियान के कोऑर्डिनेटर रूप मेंकई महत्वपूर्ण कार्य कर चुके हैं। उनके उत्साह का ही नतीजा है कि कोरोना वायरस के लॉकडाउन के दौरान होटलों और ढाबों को बंद होने के बावजूद  हीरालाल जैन द्वारा समस्त महाजन का अभिनव रोटी बैंक कार्यक्रम लांच कर 3,800 से अधिक परिवारों के सहयोग से तकरीबन 30,000 रोटियां जरूरतमंदों को बांटी जा रही हैं। संस्था के सूत्रों के अनुसार प्रतिदिन एकत्रित रोटियां 2 घंटे के अंदर संस्था के 300 नए स्वयंसेवक एवं  17 समस्त महाजन के नियमित वर्दीधारी स्वयंसेवकों के माध्यम से वितरित कर दिया जाता है।रोटी बैंक के कार्यक्रम से प्रतिदिन 6-7 हजार लोग लाभान्वित हो रहे हैं।अब तक कुल 2 लाख से अधिक लोग लाभान्वित हो चुके हैं ।

शाह ने आगे बताया कि  रोटी बैंक के इस कार्यक्रम का श्रेय हीरालाल जैन को जाता है।  पिछले तकरीबन 3 पखवारे से उन्होंनेठीक से सोया नहीं है। दिन रात  रोटी बैंक के चिंतन मनन में लगे रहते हैं।रोटी वितरण का कार्य समय सबसे प्रभावित क्षेत्र मलाड,कांदिवली और मीरा रोड के जरूरतमंदों तक रोजाना पहुंचाया जा रहा है। समस्त महाजन के कार्यकर्ता लॉक डाउन के नियमानुसार सोशल डिस्पेटेंसिंग,मास्क लगाने और सैनिटाइजर के प्रयोग का पूरा ध्यान रखते हैं। भोजन वितरण के समय में इच्छुक प्रतिभागियों को कबूतरों का दाना प्रदान किया जाता है और उनसे आग्रह किया जाता है कि वह घर जाकर कबूतरों को दाना देना ना भूलें और उन्हें पानी भी पिलाते रहें। भोजन वितरण कार्यक्रम के दौरान इस कार्य को सुनिश्चित करने के लिए 2 वालंटियर माइक लेकर  जीव दया का प्रचार भी करते हैं। समस्त महाजन का मानना है कि घर से रोटियां प्रदान करने वाली माताएं और बहने सचमुच अन्नपूर्णा है। उनकी दयाशीलता और करुणा के  संबल का ही नतीजा है कि रोटी बैंक कार्यक्रम सफल हो सका है। शाह ने बताया कि हीरालाल के दिमाग की उपज है कि हम भोजन वितरण में प्लास्टिक का प्रयोग नहीं करते हैं। सभी जरूरतमंद अपने घर से बर्तन (थाली- लोटा) लेकर के आते हैं और अपना भोजन ले जाते हैं। इसलिए भोजन वितरण में ना तो प्रदूषण है और न हीं गंदगी फैलने की कोई गुंजाइश। समस्त महाजन का उद्देश्य है शाकाहार के प्रति जागृति लाना, पशुबलि और पशु कुर्बानी जैसी जघन्य हिंसा को रोकना और लोगों को बताना कि यह धर्म नहीं बल्कि मानवता के लिए कलंक है।

रोटी बैंक के कार्यक्रम के इस सफलता का सूत्र पूछने पर बताया गया कि जैन धर्म के आचार्य अभय शेखरसुरेश्वर जी के शिष्य मुनीराज आर्य शेखर विजय जी के मार्गदर्शन एवं प्रेरणा से चलाया जा रहा है। अतिरिक्त खर्चों की व्यवस्था के बारे में पूछने पर बताया कि रोटी के प्रबंधन के अलावा अन्य खर्च भी आता है , वह समस्त महाजनके द्वारा वहन किया जाता है। वैसे प्रतिदिन 25 से 30 हजार रुपए का खर्चा आ रहा है जिसे समस्त महाजन पूरा करता है। आपातकाल परिस्थितियों से निपटने के लिए संस्था इस कार्यक्रम को भविष्य में योजनाबद्ध ढंग से रोटी बैंक या भोजन प्रबंधनन के लिए विचार कर रही है। 

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