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समस्त महाजन द्वारा  आयोजित तीन दिवसीय गौशाला के प्रतिनिधि प्रशिक्षण शिविर संपन्न
September 18, 2019 • डॉ.आर. बी. चौधरी DR R B CHAUDHARY

पांच राज्यों से आए 300  गौशाला प्रतिनिधियों को वापसी में  गौसेवा प्रोत्साहन हेतु चेक मिला -
आगामी दिवाली तक गौशाला प्रतिनिधियों का राष्ट्रीय सम्मेलन राजस्थान में
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18 सितंबर ; धर्मज(गुजरात) :डॉ. आर.बी. चौधरी

गुजरात के बहुचर्चित गांव धर्मज  गांव मे आज समस्त महाजन का तीन दिवसीय गौशाला  प्रतिनिधि भ्रमण-प्रशिक्षण शिविर का समापन हुआ. समस्त महाजन के मैनेजिंग ट्रस्टी गिरीश जयंतीलाल शाह ने बताया कि इस गौशाला प्रतिनिधि  भ्रमण -प्रशिक्षण कार्यक्रम का मूल मकसद यह रहा है देश के किसानों, पशुपालकों एवं गौशाला संचालकों  अपनी पारंपरिक  रहन -सहन एवं संस्कृति के अनुसार पशुओं की प्रबंधन करना,ताकि गौ संरक्षण-संवर्धन के लिए  गांव-घर में मौजूद संसाधनों के बेहतर उपयोग से ग्रामीण व्यवस्था के  दायरे में रहकर गौशाला संचालित कर सकें  और उन्हें अन्य कहीं संसाधन-सुविधा खोजने न जाना पड़े. शाह ने बताया कि इस  भ्रमण - प्रशिक्षण अभियान में कुल 300 प्रशिक्षु शामिल हुए. अब तक समस्त महाजन द्वारा कुल पांच प्रशिक्षण आयोजित करके तकरीबन  3,500  गौशाला प्रतिनिधियों एवं पशु प्रेमियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है जिन्होंने अपने-अपने जिले में गौ संरक्षण -संवर्धन की एक कोशिश ही नहीं बल्कि गौ संरक्षण संवर्धन की  अभियान आरंभ की है, जो अनुकरणीय है.

राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता  स्वयंसेवी संस्था - समस्त महाजन के मैनेजिंग ट्रस्टी  एवं  भारत सरकार के अधीन कार्यरत भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड के सदस्य गिरीश शाह ने बताया कि आज प्रशिक्षण के तीसरे दिन विभिन्न प्रदेशों से आए कुल 300 गौशाला प्रतिनिधियों को गुजरात के प्रख्यात धर्मज  गांव में उन्हें  गौशाला प्रबंधन के विशिष्ट कार्यों को दिखाया गया ताकि वह धर्मज गांव से प्रेरणा लें और अपनाएं. प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुरुआत फिलहाल राजस्थान के परलाई सिरोही में वर्ष 2011 में स्थापित  श्री सूरी प्रेम जीव रक्षा केंद्र से आरंभ की गई और वहां के  संचालन व्यवस्था का इतिहास बताया गया.इस गौशाला में पशुओं के गोदनामा  पद्धति पर इसकी शुरुआत की गई थी जो आज  उसी क्रम में  न केवल संचालित है बल्कि फलता- फूलता एक आधुनिक गौशाला बन गया है. इसी क्रम में  25 साल पुरानी  समाजसेवी के.पी. संघवी परिवार द्वारा  पूरी तरह से एक व्यक्ति द्वारा  संचालित सुमति जीव रक्षा केंद्र पर  पाले  जा रहे 10,000 गोवंश की बेहतरीन व्यवस्था  दिखाने से के बाद अहमदाबाद स्थित एक  जाने-माने गौ संरक्षण संरक्षण केंद्र- वंसी  गिर गौशाला का भ्रमण भी कराया गया जहां पर गिरी नस्ल के पशुओं का अद्भुत प्रबंधन,अनुसंधान एवं विकास दिखाया गया. वंसी  गिर गौशाला में एक व्याख्यानमाला का भी आयोजन किया गया जिसमें गोबर गोमूत्र के प्रयोग पर वैज्ञानिक अनुसंधान और विकास पर चर्चा की गई और पशु सुरक्षा के से लेकर ऑर्गेनिक फार्मिंग की महत्ता बताई गई.संस्था के संचालक गोपाल सुतरिया ने गोबर  खाद को अधिक उपायोगी बनाने के लिए बैक्टीरियल कल्चर की बात  बताई और कहा कि कि इस कल्चर में 48 प्रकार के जीवाणु है जो की खेती में बेहद फायदेमंद है।उन्होंने इस कल्चर कोनमूने के रूप में सभी प्रशिक्षुओं को नि:शुल्क उपलब्ध कराने की घोषणा की.

इस भ्रमण प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान  जीव संरक्षण केंद्रों की प्रशिक्षणार्थियों ने बहुत कुछ देखा और सीखा. किंतु इसमें सबसे  अधिक आकर्षित करने वाली संस्था रही है जलाराम गौशाला  क्योंकि जलाराम गौशाला की एक इकाई  पूर्णतया पशु अस्पताल है और वहां पर तकरीबन 1,200 बीमार पशुओं की  बेहतरीन देख-भाल की जाती है. सबसे रोचक बात यह है कि इस गौशाला में कुल 7  विभिन्न प्रकार के वार्ड बनाए गए हैं जहां पर अलग-अलग बीमारी के पशुओं की चिकित्सा की जाती है और फिर उन्हें सामान्य  हो जाने पर गौशाला में स्थानांतरित कर दिया जाता है.जलाराम गौशाला -अस्पताल के प्रभारी डॉ. के. पी. पंचाल ने बताया कि  वर्ष 1999 में स्थापित इस केंद्र पर पशुओं की रक्षा के लिए 20 एंबुलेंस रात -दिन चलते हैं और सालाना ₹15 करोड़ खर्च होता है. उन्होंने यह भी बताया कि तकरीबन 180 अंधे, 225 प्रोलेप्स , 190 और हॉर्न कैंसर,170 हड्डी की परेशानियों से पीड़ित पशु भर्ती है और 360 पशु विभिन्न संक्रामक बीमारियों से प्रभावित है जिनकी निरंतर पशुओं की सेवा की जा रही है.रोचक बात यह है कि इस अस्पताल में तकरीबन दो दर्जन स्वयंसेवी पशु चिकित्सक  दिन-रात अपनी सेवाएं दे रहे हैं.  

इस अवसर पर फलोदी के युवा पशु प्रेमी रविंद्र जैन ने बताया कि समस्त महाजन के कई प्रयोग किए गए है जहां निरंतर सफलता की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं. अब तक राजस्थान के कुल 13 गांव में तैनात की गई जेसीबी मशीन से तालाबों की मरम्मत एवं खुदाई की गई थी जिसका नतीजा है कि आज सारे तालाबों में तकरीबन 8 से 9 फुट गहरा पानी भर गया जिसे किसी भी भावी विषम परिस्थिति में प्रयोग किया जा सकता है और पशुओं को तड़प-तड़प कर मरने से बचाया जा सकता है. उन्होंने बताया कि तालाबों के पुनरुद्धार का कार्य सबसे पहले फलोदी से आरंभ किया गया और इस कार्य में समस्त महाजन ने 3 जेसीबी उपलब्ध कराया जिनकी संख्या बाद में बढ़ा दी गई थी.समस्त महाजन के पद्धति के अनुसार जेसीबी पर होने वाले डीजल खर्च गौशालाओं के माध्यम से किया गया. रविंद्र जैन के अनुसार आज हर तालाब में 8 से 9 फुट गहरा पानी उपलब्ध है जिससे तकरीबन 8 से 10 महीने तक का पानी की जरूरत पूरी की जा सकती है. रविंद्र जैन ने यह भी बताया कि इस साल तालाब के किनारे कुल 165 पौधे लगाए गए जो बेहद हरे भरे हो गए हैं जबकि पहले इनके जगह पर अंग्रेजी बबूल लगे हुए थे.

समस्त महाजन के  मैनेजिंग ट्रस्टी शाह ने  बताया कि प्रशिक्षण के आखिरी दिन  सभी प्रशिक्षणार्थियों को गुजरात के चर्चित धर्मज   गांव का भी भ्रमण कराया गया और चारा उत्पादन की रंपरिक तकनीक से स्वाबलंबन का बेहद उत्कृष्ट नमूना है. धर्मज में किसानों का दुग्ध उत्पादन एवं पशु प्रबंधन बहुत बढ़िया है. बताया जाता है कि गांव में 11 राष्ट्रीयकृत बैंक हैं जिसमें 1,000 करोड़ की फिक्स डिपाजिट  है. अभी तक गांव में कोई चोरी नहीं  हुई और न  ही पुलिस स्टेशन है. पूरा गांव एक आधुनिक शहर है जहां पर बच्चों के खेलने के पार्क और स्विमिंग पुल की भी इंतजाम है. शाह ने बताया कि स्थानीय लोग महज  400 -500 रुपए खर्च करके  बड़े शहर जैसा पारिवारिक भ्रमण का आनंद लेते हैं. बाहर से आए तथा स्थानीय लोग कम से कम खर्च में मनोरंजन करते हैं. अपनी उपलब्धियों की वजह से आज धर्म गांव का नाम गिनीज बुक में रिकॉर्ड हो गया है.यही कारण है कि इस गांव को लोग दूर-दूर से भी देखने आते हैं. उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों को बताया कि जब धर्मज गांव आज  चारा विकास एवं पशुधन प्रबंधन  के दिशा में विश्व का एक आकर्षण केंद्र हो सकता है-तो  हमारी गौशालाए क्यों नहीं. 

संस्था के ट्रस्टी देवेंद्र जैन ने बताया कि आज  प्रशिक्षण कार्यक्रम में शरीक सभी  गौशाला प्रतिनिधियों को खाली हाथ नहीं जाने दिया गया और उन्हें  10 हजार से 20 हजार  रुपए का  चेक   प्रोत्साहन स्वरूप दिया गया ताकि वह अगले प्रशिक्षण में  जब दोबारा शामिल हो ताकि समस्त महाजन के स्वावलंबन अभियान में  अपनी प्रगति की बातें बता सके. इस अवसर पर  गोवंश बचाने के लिए  बीएसएफ के शहीद जवान संजय साधू  के परिवार को 50 हजार की सहायता राशि प्रदान की गई. साथ ही साथ सिणधरी आश्रम के मठाधीश रघुनाथ स्वामी को पशु प्राण रक्षा  एवं भरण पोषण हेतु  और अजीत सेवा ट्रस्ट वापी गुजरात द्वारा बकरीद के अवसर पर अवैधानिक तौर पर कुर्बानी के लिए जा रहे पशुओं को बचाने  के लिए भी पांच-पांच  लाख का चेक दिया गया.

समस्त महाजन के मैनेजिंग ट्रस्टी शाह ने बताया कि  राजस्थान में जब किसान पशु की देख भाल नहीं कर पाते  तो तिलक लगाकर उन्हें छोड़ देते हैं.उन्होंने कहा कि साधन हीन व्यवस्था और मजबूरी के इस  दयनीय स्थिति से लोगों को बचना चाहिए और  अपने पशुओ  की प्राण रक्षा के लिए आगे आना चाहिए.  उन्होंने बताया कि दीपावली के आस-पास राजस्थान में प्रवासी संत सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा  जिसमें पूरे देश से आध्यात्मिक और बौद्धिक व्यक्तित्व के लोग शिरकत करेंगे. इस आयोजन  में अधिक से अधिक गौ सेवक एवं पशु प्रेमियों को शामिल होने का अपील किया और कहा कि आयोजन के तिथि की घोषणा शीघ्र की जाएगी.

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